हिंदी की दशा में निख़ार हेतु आधिकारिक संरक्षण की दरकार: डा. वेद पाल आर्य

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हिंदी दुनिया की चुंनिंदा सभ्य-सौम्य भाषाओं में एक: प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा

हिंदी दिवस पर जीसीडब्ल्यू सिरसा में हुई विचार-गोष्ठी, भाषण एवं राज्य-स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता

जिस तरह बीज के अंकुरित होकर पौधा बनने व वृक्ष का रूप धारण करने की प्रक्रिया तो स्वाभाविक है परन्तु उस वृक्ष को यदि एक परिपक्व माली का संरक्षण मिल जाए तो उसका कायाकल्प हो जाता है ठीक इसी प्रकार निःसंदेह हिंदी एक वटवृक्ष के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है किन्तु इसकी दशा में और निख़ार हेतु इसे प्रतिबद्ध राजनैतिक एवं आधिकारिक संरक्षण की दरकार बाकी है। यह विचार सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं प्रबुद्ध शिक्षाविद डा. वेद पाल आर्य ने राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में मुख्यातिथि के तौर पर अपने संबोधन में व्यक्त किए। उन्होंने हिंदी दिवस के इतिहास एवं महत्त्व से विस्तारपूर्वक अवगत करवाते हुए कहा कि हिंदी भाषा भारत समेत विश्व की पुष्पित-पल्ल्वित भाषा है

और हिंदी भाषा व हिंदी भाषी लेखकों ने अपने बलबूते जो क्षमता व दक्षता हासिल की है वह उल्लेखनीय है। यह जानकारी देते हुए महाविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डा. हरविंदर सिंह ने बताया कि हिंदी विभाग के विस्तार व्याख्याताओं प्रो. निर्मला देवी व प्रो. कपिल कुमार सैनी के संयोजन में आयोजित हिंदी दिवस समारोह की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा, वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों प्रो. जसबीर कौर व प्रो. यशपाल रोज पर आधारित अध्यक्षमंडल ने की। कार्यक्रम का आगाज़ सांस्कृतिक समिति संयोजक डा. यादविंदर सिंह व तबला वादक मनोहर लाल के सान्निध्य में संगीत विभाग की छात्राओं कशिश खट्टर, कीर्ति सोनी व ख़ुशबू द्वारा स्वागत गीत की प्रस्तुति से हुआ।

समारोह में कशिश, कीर्ति, सोनी व सेवादार सोहन सिंह ने अपने गीतों की शानदार प्रस्तुति से समारोह को और भी रोमांचिक बना दिया। इस अवसर पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में महाविद्यालय की छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। प्रो. विक्रमजीत सिंह व प्रो. सविता दहिया पर आधारित अध्यक्षमंडल ने इन प्रतिभागियों में से बिंदु, मीनू व सुलोचना का तीन श्रेष्ठ वक्ताओं के रूप में चयन किया जिन्हें मुख्यातिथि व प्राचार्य के कर-कमलों द्वारा तीन-तीन सौ रुपए की नकद राशि प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में करवाई गई ऑनलाइन निबंध-लेखन प्रतियोगिता के परिणाम की भी मुख्यातिथि द्वारा उद्घोषणा की गई। इस राज्य-स्तरीय निबंध लेखन प्रतियोगिता में राजकीय महाविद्यालय, बादली की जीतल, राजकीय महिला महाविद्यालय, सिरसा की कोमल व माता मनसा देवी राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, पंचकूला के रितिक भारद्वाज ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान अर्जित किया। इन विजेता प्रतिभागियों को क्रमशः पाँच सौ, तीन सौ व दो सौ रूपए की नकद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।

हिंदी दिवस समारोह में अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. राम कुमार जांगड़ा ने हिंदी को एक वैज्ञानिक भाषा बताते हुए इसका शुद्ध उच्चारण किए जाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने हिंदी को विश्व की चुनिंदा सभ्य-सौम्य भाषाओं में उत्कृष्ट बताते हुए इसके अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. निर्मला देवी व प्रो. कपिल कुमार सैनी ने किया। महाविद्यालय के स्टाफ सचिव डा. हरविंदर सिंह ने समारोह के मुख्यातिथि, अध्यक्षमंडल, निर्णायकमंडल, प्रतिभागियों, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुतकर्त्ताओं, आयोजकों, अन्य सहयोगियों व उपस्थिजन के प्रति आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि मातृ-भाषाओं को नज़रअंदाज कर किसी भी भाषा के उत्थान की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती इसलिए मातृ-भाषा, संपर्क भाषा व एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा के प्रारूप को लागू करना ही इसका एकमात्र विकल्प है।

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