जींद में तकनीकी खामी से तीन कोरोना संक्रमितों की मौत, अस्पताल प्रबंधन पर लगे लापरवाही के आरोप तो डीसी ने दिए जांच के आदेश

PMG News जींद

तकनीकी खामी के चलते बुधवार रात नागरिक अस्पताल के वेंटिलेटर में ऑक्सीजन का फ्लो अचानक कम हो जाने से उपचाराधीन तीन कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल खड़े किये हैं। डीसी डा. आदित्य दहिया ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बहरहाल तीनों मृतकों के कोविड नियमों के तहत अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
नागरिक अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन टैंक के माध्यम से कोरोना वार्ड में सप्लाई की जाती है। बुधवार रात को अचानक प्लांट में तकनीकी खराबी आ गई और ऑक्सीजन का फ्लो कुछ समय के लिए बंद हो गया। प्लांट में मौजूद कर्मियों ने सिलेंडरों के माध्यम से जैसे-तैसे ऑक्सीजन की सप्लाई को शुरू किया, लेकिन इसमें कुछ समय लग गया और वेंटिलेटर को ऑक्सीजन का पर्याप्त प्रेशर नहीं मिल पाया। इसी कारण वेंटिलेटर पर मौजूद गांव रधाना, शहर के राजनगर व पानीपत के इसराना निवासी कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई।
एकसाथ तीन कोरोना संक्रमितों की मौत से अस्पताल में हड़कंप मच गया और परिजनों ने वार्ड स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंच स्थिति का जायजा लिया और मृतक परिजनों को जांच का आश्वासन दिया। डीसी डा. आदित्य दहिया ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आते ही उन्होंने तुरंत सीएमओ से बात की। तकनीकी फॉल्ट के चलते ऑक्सीजन का फ्लो कम हुआ है। बावजूद इसके सीएमओ इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अगर कहीं लापरवाही हुई है तो इस मामले में सख्त संज्ञान लिया जाएगा।
कोविड इंचार्ज एसएमओ डॉ गोपाल गोयल ने बताया कि इन मरीजों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है। उन्होंने कहा की अस्पताल प्रशासन द्वारा इन्हे बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद इनकी मौत हो गई, जो दुखद है। उन्होंने बताया की अस्पताल के टैंक में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बुधवार को 3000 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन उपलब्ध थी तथा आज भी 2600 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन का स्टॉक टैंक में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस वार्ड में 40 अन्य कोरोना मरीज फुल फ़्लो ऑक्सीजन पर तथा 10 मरीज वेंटिलेटर पर हैं, जिनमें से इन 3 मरीजों की हालत पहले से गंभीर थी। ये तीनों मरीज वेंटिलेटर पर थे. इलाज के दौरान इनका ऑक्सीजन लेवल 30 से 40 के बीच जा चुका था।
डॉ गोयल ने बताया कि निमोनिया के कारण तीनों मरीजों के फेफड़े भी काफी कमजोर हो चुके थे। डॉक्टरों की टीम द्वारा इनकी गंभीर हालत को देखते हुए वेंटिलेटर के मोड को भी बदल कर देखा गया था। वेंटिलेटर पर एडमिट सभी मरीजों के पास डॉ अरुण व वेंटिलेटर टेक्नीशियन मनजीत लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी वार्ड में दाखिल अन्य मरीज जो वेंटिलेटर पर थे तथा फुलफ्लो ऑक्सीजन पर थे, वह भी सभी ठीक हैं।

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