गेहूं खरीद में शिक्षकों सहित अन्य विभागों के कर्मियों की लग सकती है ड्यूटी, मंडी बोर्ड जुटा रहा है डाटा, शिक्षक व PWD कर्मचारी गांव गांव जाकर खरीदेंगे गेहूं

PMG News Chandigarh

गेहूं खरीद में भले ही अभी 15 दिन का समय हो। लॉकडाउन की अवधि भी इससे पहले खत्म हो जाएगी। फिर भी हरियाणा सरकार गांव-गांव से गेहूं खरीद करने की योजना बना रही है। अब तक करीब 400 खरीद केंद्रों से गेहूं की खरीद की जाती रही है, लेकिन अब इन खरीद केंद्रों को दोगुना किया जा सकता है। यही नहीं गेहूं खरीद के लिए सरकार अन्य विभागों के कर्मियों की डयूटी भी लगाई जा सकती है। इनमें पीडब्ल्यूडी विभाग के कर्मचारियों के अलावा शिक्षकों की मदद ली जा सकती है

फिलहाल विभाग आंकड़ा जुटा रहा है कि किन-किन विभागों के कर्मियों को खरीद के साथ जोड़ा जाए। जल्द ही इस संदर्भ में सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम की आला अधिकारियों के साथ बैठक होगी। इसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा



सरकार की योजना है कि बड़े गांवों के खेल स्टेडियम, सत्संग भवन आदि में खरीद प्रक्रिया हो। ऐसे में करीब 80 लाख टन गेहूं सरकार को देहात से खरीदना पड़ेगा। हरियाणा में अबकी बार करीब 25 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल है और इससे करीब 125 से 130 लाख टन गेहूं उत्पादन होने की उम्मीद है। कुल गेहूं उत्पादन में से करीब 80 फीसदी गेहूं की खरीद की जाती है।

रबी की सबसे बड़ी फसल गेहूं की कटाई का कार्य अब धीरे-धीरे तेजी पकड़ने लगेगा। हाथ से गेहूं की कटाई पहले शुरू होती है, जबकि कंबाइन इसके एक सप्ताह बाद गेहूं कटाई करती है। क्योंकि तब तक फसल पूरी तरह से पक चुकी होती है। प्रदेश में करीब पांच हजार कंबाइन जल्द ही गेहूं की कटाई में जुट जएंगी।



संबंधित विभाग एक मोबाइल एप बनाएगी, जिस पर किसानों को कंबाइन उपलब्ध होगी। इस एप के जरिए किसान कंबाइन संचालकों से संपर्क कर सकेंगे, ताकि उन्हें दूर-दराज के इलाकों में न जाना पड़े। क्योंकि अबकी बार प्रदेश में मजदूरों की कमी भी है। राज्य सरकार ने इसके लिए केंद्र से भी संपर्क किया है, क्योंकि हरियाणा से हर साल करीब 15 फीसदी केंद्रीय पूल में अनाज जाता है।

प्रदेश में फिलहाल खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं है। डेढ़ माह का राशन एडवांस में है। जबकि खाद्यान्नों से गोदाम भरे हुए हैं। दाल, सरसों तेल आदि की आपूर्ति तेजी से हो रही है, जिला वाइज रिपोर्ट रोजाना जुटाई जा रही है। जहां भी किसी तरह की सूचना आती है, वहीं पर तुरंत कार्रवाई होती है। काला बाजारियों पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।




प्रदेश में गेहूं कटाई का कार्य तेजी पकड़ लेगा। प्रदेश में गेहूं की खरीद के लिए तैयारी चल रही है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी कर्मियों व अध्यापकों की भी मदद ली जा सकती है। अन्य विभागों का भी आंकड़ा जुटाया जा रहा है। यह संकट की घड़ी है, हर विभाग के कर्मचारी इसके लिए आगे आ रहे हैं। जिन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, उसका वे बखूबी निर्वहन करेंगे – दुष्यंत चौटाला, डिप्टी सीएम, हरियाणा।

हरियाणा में किसानों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार ने गन्ने के बकाया के भुगतान के लिए 169 करोड़ रुपए की राशि जारी कर दी है। यह राशि राज्य की दस चीनी मिलों को जारी की गई है और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए है कि राज्य के गन्ना फसल के किसानों के बकाया का भुगतान किया जाए ताकि वर्तमान में उत्पन्न हुई स्थिति में उन्हें सहयोग मिल सकें।



सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि पानीपत की सहकारी चीनी मिल को 15.80 करोड़ रुपए, रोहतक की सहकारी चीनी मिल को 27.30 करोड़ रुए, करनाल की सहकारी चीनी मिल को 18.30 करोड़ रुपए, सोनीपत की सहकारी चीनी मिल को 21.10 करोड़ रुपए, शाहाबाद की सहकारी चीनी मिल को 3.70 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है। जींद की सहकारी चीनी मिल को 13.50 करोड रूपए, पलवल की सहकारी चीनी मिल को 25.35 करोड रुपए, महम की सहकारी चीनी मिल को 17.20 करोड रुपए, कैथल की सहकारी चीनी मिल को 19.15 करोड़ रुपए और गोहाना की सहकारी चीनी मिल को 7.60 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई है।



31 मार्च को किसानों के हितों को देखते हुए राज्य सरकार ने पानीपत, करनाल और फतेहाबाद जिलों के किसानों की सरप्लस गन्ने की फसल को अन्य चीनी मिलों में भेजने का निर्णय लिया ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो।

उन्होंने बताया कि पानीपत से गोहाना की सहकारी चीनी मिल को दो लाख क्विंटल गन्ने की फसल भेजी गई है जबकि पानीपत से महम की सहकारी चीनी मिल को तीन लाख क्विंटल गन्ने की फसल भेजी है। पानीपत से भादसों की चीनी मिल को पांच लाख क्विंटल गन्ना भेजा गया है व करनाल से नारायणगढ की चीनी मिल को भी पांच लाख क्विंटल गन्ने की सरप्लस पैदावार भिजवाई गई है। फतेहाबाद जिला के गांवों से जींद की चीनी मिल को लगभग चार लाख क्विंटल गन्ने की सरप्लस फसल भेजी गई है।

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